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श्रीकृष्ण जी का उध्यव जी को आत्मज्ञान।। श्रीमद भागवद पुराण* * चौथा अध्याय*स्कंध ३

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।। श्री गणेशाय नमः।। -  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय  -  ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।   -  ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।  -  ॐ विष्णवे नम:   - ॐ हूं विष्णवे नम:  - ॐ आं संकर्षणाय नम:  - ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:  - ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:  - ॐ नारायणाय नम:  - ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।  ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, कमण्डलु धाराय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ परमेश्वर्याय विद्महे, परतत्वाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥ धर्म कथाएं Bhagwad puran विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ५] श्रीमद...

उद्धव जी द्वारा भगवान श्री कृष्ण का बल चरित्र वर्णन।।

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श्रीमद भागवद पुराण अध्याय २ स्कंध ३ विदुर उध्यव संवाद दो०-उद्धव ने श्री कृष्ण को बरनी कथा सुनाय। सो द्वतीय अध्याय में विदुर सुनो मन लाय ॥ पिछले अध्याय में आपने पढ़ा जब इस प्रकार भगवद्भक्त उद्धव जी से विदुर जी ने श्री कृष्ण जी की वार्ता पूछी तो श्री कृष्ण विरह का स्मरण कर गद-गद कठ हो उद्धव जी कुछ उत्तर न दे पाये, पश्चात नेत्रों में आये प्रेमाश्रुओं को पौंछ कर मन्द मुसक्यान से यदुकुल के संहार का स्मरण करते हुये उद्धव जी ने विदुर जी से इस प्रकार कहा-हे विदुर जी! मैं आपसे सूर्य रूप श्री कृष्ण के अस्त होने तथा अजगर रूप काल द्वारा शोभा हीन यादवों की क्या कुशल क्षेम कहूँ। भगवान ने जो रूप अपनी योग माया का बल दिखाने के लिये नर लीला को गृहण किया था, वह रूप आपको विस्मित करने को आभूषणों का भूषण रूप था। बड़े खेद की बात है कि जिस नंद नंदन को मारने की इच्छा से दुष्टा पूतना राक्षसी ने काल कूट को अपने स्तनों पर लगा कर गोद में ले दूध पिलाया था उस दुष्टा को भी भगवान कृष्ण ने अपनी यशोदा मैया के समान जान कर उत्तम गति प्रदान की थी। यद्यपि भक्तों को अनेकों वर्ष तक तप करने पर भी जो दर्शन दुर्लभ है सो उन श्री ...

श्रीकृष्ण भगवान ने पाण्डवों की रक्षा।।अर्जुन कृष्णा प्रेम।। श्रीकृष्ण स्तुति।।यदुकुल का नाश।।

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पृथ्वी और अन्य सभी पाताल लोकों का विधिवत वर्णन। गृहण क्या है? (पाताल स्थित नरक का वर्णन ) Where does the soul goes in between reincarnations?  विष्णु भगवान का सर्वदेवमय स्वरूप।। श्रीमद भागवद पुराण अध्याय २३ [स्कंध ५] -  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय  -  ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।   -  ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।  -  ॐ विष्णवे नम:   - ॐ हूं विष्णवे नम:  - ॐ आं संकर्षणाय नम:  - ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:  - ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:  - ॐ नारायणाय नम:  - ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।  ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, कमण्डलु धाराय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ परमेश्वर्याय विद्महे, परतत्वाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥ धर्म कथाएं विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • ...

युधिष्ठिर को कलयुग के लक्षण का आभास होना।।

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-  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय  -  ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।   -  ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।  -  ॐ विष्णवे नम:   - ॐ हूं विष्णवे नम:  - ॐ आं संकर्षणाय नम:  - ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:  - ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:  - ॐ नारायणाय नम:  - ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।  ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, कमण्डलु धाराय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥  ॐ परमेश्वर्याय विद्महे, परतत्वाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ॥ धर्म कथाएं विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ५] श्रीम...